भारत का CAA कानून: किसे और कैसे मिलेगी नागरिकता

भारत का CAA कानून: किसे और कैसे मिलेगी नागरिकता-हमारे देश की सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून लागू करने की घोषणा कर दी है. इस कानून के अंतर्गत हमारे तीन पड़ोसी देश बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हुए कुल 6 अल्पसंख्यक समुदाय को भारत की नागरिकता दी जाएगी.इन समुदायों के अंतर्गत हिंदू, सिख, बौद्ध जैन, पारसी और इसाई धर्म के लोग शामिल होंगे. आपको बता दें भारत की नागरिकता पाने के लिए उपरोक्त समुदाय के प्रवासी व्यक्ति का पिछले 12 महीने से लगातार और 14 सालों में से 11 सालों में भारत का निवास होना चाहिए. कुछ मामलों में निवास की आवश्यकता को 11 वर्ष से घटकर 5 वर्ष भी कर दिया गया है.तो आज हम इसी पर विस्तार से चर्चा करेंगे कि भारत का CAA कानून: किसे और कैसे मिलेगी नागरिकता पर बिंदु बार पूरी जानकारी आपको उपलब्ध कराएंगे. इससे आपको स्पष्ट हो जाएगा. यहॉ कानून क्यो जरुरी है.

CAA BILL

क्या है CAA कानून?

नागरिकता संशोधन कानून 2019 भारत के तीन पड़ोसी मुस्लिम बहुल देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के उन अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता देने का काम करेगा, जो31 दिसंबर 2014 तक किसी न किसी प्रताड़ना का शिकार होकर भारत में शरण लिए हुए हैं. इसमें ऐसे गैर मुस्लिम माइनॉरिटी समुदाय के व्यक्ति जिनमे हिंदू, सिख,बौद्ध, इसाई, जैन और पारसी समुदाय के लोग शामिल होंगे. आपको बता दें भारत के मुसलमान या किसी भी धर्म और संप्रदाय के लोगों की नागरिकता को इस से कोई खतरा नहीं होगा. यह उन नागरिकों के लिए कानून है जो किसी उपरोक्त तीनों देशों में प्रताणित होने पर भारत में शरणार्थी का जीवन जी रहे हैं. ऐसे लोगों को भारतीय नागरिक होने का दर्जा देने का काम करेगा.

नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 का क्या उद्देश्य है?

नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 CAA का उद्देश्य नागरिकता अधिनियम, पासपोर्ट अधिनियम और विदेशी अधिनियम में बदलाव करना है.यह बदलाव उन वैध प्रवासियों के लिए नागरिकता प्राप्त करना आसान हो जाता है जो नागरिक हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय के अंतर्गत आते हैं. जिनमे हिंदू, जैन, सिख, ईसाई, बौद्ध और पारसी समुदाय के लोग हैं. जो उपरोक्त तीनों देशों में माइनॉरिटी समुदाय के अंतर्गत आते हैं और इन लोगों के साथ वहां के बहुसंख्यक के लोग दोयम दर्जे का व्यवहार करते हैं. ऐसे व्यक्तियों को CAA कानून के अंतर्गत भारत की नागरिकता प्रदान की जाएगी.

CAA की विशेषताएं क्या हैं?

नागरिकता संशोधन अधिनियम CAA की मुख्य विशेषता यह है कि भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान जो कि मुस्लिम बाहुल्यदेश हैं. वहां पर धार्मिक अल्पसंख्यको के अंतर्गत आने वाले समुदाय हिंदू, जैन, सिख, ईसाई, बौद्ध और पारसी लोगों को भारत की नागरिकता प्राप्त करना आसान हो जाएगा. CAA का उद्देश्य नागरिकता अधिनियम 1955 में संशोधन करके पड़ोसी देशों में धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को भारत की नागरिकता देना है.

CAA कानून किन लोगों पर लागू होता है?

नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 कानून के अंतर्गत पाकिस्तान,अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए हिंदू, सिख ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी धर्म से जुड़े शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दी जाएगी. ऐसे लोग जो 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में आकर बस गए थे.यह कानून उन्हीं लोगों को नागरिकता प्रदान करेगा. नागरिकता संशोधन अधिनियम के अंतर्गत अवैध रूप से प्रवास करने वाले लोगों को अवैध प्रवासी माना जाएगा. इसके अंतर्गत भारत में वैध दस्तावेज दस्तावेज के बिना भारत में प्रवास कर रहे हैं या अवैध दस्तावेज के साथ भारत में तय समय सीमा से ज्यादा रूके हुए हैं. ऐसे लोगों को अवैध प्रवासी माना जाएगा. आपको स्पष्ट कर दें नागरिकता संशोधन कानून लागू होने के बाद किसे नागरिकता देनी है और किसे नागरिकता नहीं देनी है इसका पूरा-पूरा अधिकार केंद्र सरकार के पास होगा.

कब पारित हुआ था CAA?

नागरिकता संशोधन अधिनियम पहली बार 2016 की लोकसभा में पेश किया गया था. लोकसभा से बिल पास हो जाने के बाद यह बिल राज्यसभा में पेश किया गया. राज्यसभा में यह बिल अटक गया अर्थात राज्यसभा से यह बिल पास नहीं हो सका. इसके बाद इसे संसदीय समिति के पास भेजा गया और 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद फिर से बीजेपी की सरकार बनी. दिसंबर 2019 में इसे दोबारा से लोकसभा में पेश किया गया और इस बार यह लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों से पास हो जाने के बाद 10 जनवरी 2020 को राष्ट्रपति द्वारा इस मंजूरी दे दी गई. लेकिन उस समय कोरोना वायरस जैसी महामारी आने के कारण कानून को देश में लागू नहीं किया गया. 11 मार्च 2024 को देश में CAA को लागू कर दिया गया है. जिसके अंतर्गत सरकार द्वारा एक पोर्टल लॉन्च किया गया है. जिसमें नागरिकता मांगने वाले व्यक्ति अपना आवेदन ऑनलाइन कर सकते हैं. आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन रखी गई है.

नागरिकता क्या है?

नागरिकता व्यक्ति और राज्य के बीच एक समझौता है,जो एक दूसरे के संबंध को दर्शाता है जो नागरिक को विशिष्ट कानूनी अधिकार प्रदान करता है, वही नागरिको के कर्तव्यों को भी स्पष्ट करता है. नागरिकता का प्रयोग आमतौर पर राष्ट्रीयता के लिए किया जाता है. एक नागरिक भारत का पूर्ण सदस्य हैं और देश के प्रति निष्ठावान है.उन्हें सभी राजनीतिक अधिकार प्राप्त है और देश की प्रति अपने कर्तव्यों का बोध है.

भारत में नागरिकता

हमारे देश का संविधान पूरे भारत के नागरिकों के लिए नागरिकता का प्रावधान करता है. ऐसा व्यक्ति जो भारत में रहता है, चाहे वह किसी भी राज्य या क्षेत्र से हो उसे भारत की का नागरिक माना जाता है. हमारे संविधान के अनुच्छेद 11 के अंतर्गत देश की संसद को नागरिकता के अधिकार को नियंत्रित करने का अधिकार दिया गया है. इसी अधिकार के अंतर्गत नागरिकता अधिनियम 1955 बनाया गया था. यह कानून बनाते समय स्पष्ट किया गया था कि कौन भारत का नागरिक बन सकता है और कैसे बन सकता है. इसका पूरा विवरण अनुच्छेद 11 में दिया गया है,सन 1987 तक भारत में जन्मे किसी भी व्यक्ति को भारत का नागरिक माना जाता था, लेकिन कुछ लोग इस कानून का उलझन करने लगे. इसके लिए भारतीय संविधान में बदलाव किया गया. कि भारत की नागरिकता के लिए आवश्यक है की माता-पिता में से कोई एक भारत का नागरिक हो. साथ ही 2004 में कानून में बदलाव किया गया, कि ऐसे नागरिकजिनमें से जिनकी माता-पिता में से एक भारतीय होगा. उसे भारतीय नागरिक माना जाएगा. जबकि यदि माता-पिता अवैध प्रवासी है,तो ऐसे नागरिकों को भारतीय नागरिकता नहीं प्रदान की जाएगी. संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार संसद को नागरिकता से संबंधित कानून बनाने का अधिकार दिया गया है.

नागरिकता प्राप्त करने के कानून क्या हैं?

भारत के वर्तमान कानून के अनुसार अवैध प्रवासी नागरिकता के लिए आवेदन नहीं कर सकते हैं. नागरिकता के लिए पंजीकरण या देसी कारण के माध्यम से भारतीय नागरिक बनने से रोक दिया गया है. विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम ऐसे लोगों को प्रतिबंधित करता है और अवैध प्रवासियों को जेल में डालने का प्रावधान भी करता है.

पंजीकरण के माध्यम से नागरिकता

भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 51 के तहत भारतीय मूल का कोई भी व्यक्तिजो पंजीकरण के लिए आवेदन करने से पहले 7 साल से भारत में सामान्य रूप से निवास कर रहा हो. वह व्यक्ति भारत का नागरिक बन सकता है. ऐसे व्यक्तियों को नागरिकता के लिए आवेदन करने से पहले लगातार 12 महीने तक भारत में रहना जरुरी है.लगातार 12 माह भारत मे रहने वाला व्यक्ति नागरिकता के लिए आवेदन कर सकता है.

देशीयकरण के माध्यम से नागरिकता

भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955 के अंतर्गत देसी कारण के माध्यम से भी व्यक्ति भारत की नागरिकता प्राप्त कर सकता है. इसमें पात्रता के लिए आवेदक को पिछले 12 महीने लगातार रहने के साथ ही पिछले 14 वर्षों में से कम से कम 11 वर्षों के दौरान भारत में रहना अनिवार्य है. जो व्यक्ति उपरोक्त में से एक भी शर्त पूरी नहीं करता है.उसे भारत की नागरिकता प्राप्त नहीं हो सकती है.इसलिए भारत की नागरिकता प्राप्त करने के लिए पिछले 12 महीने में लगातार भारत में निवास करना आवश्यक है साथ ही साथ पिछले 14 वर्ष में से 11 वर्ष भारत में निवास किया हो.

CAA कानून के तहत किये गए बदलाव

नागरिकता के लिए कट ऑफ डेट भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने की कट ऑफडेट 31 दिसंबर 2014 की गई है अर्थात आवेदक को उस तारीख को या उससे पहले भारत में प्रवेश किया हुआ होना चाहिए.

देसीकारण की आवश्यकता नागरिकता संशोधन अधिनियम CAA के अंतर्गत हिंदू, सिख,बौद्ध, जैन, इसाई और पारसी कुल 6 धर्म से संबंधित आवेदकों के लिए देसी कारण की 11 वर्ष की बाध्यता को घटकर 5 वर्ष कर दिया गया है.

नागरिकता प्राप्त करने पर क्या होगा?

नागरिक संशोधन अधिनियम CAA 2019 के अंतर्गत नागरिकता प्राप्त व्यक्ति को प्रवेश की तारीख से ही भारत का नागरिक माना जाएगा और उनके अवैध प्रवास या नागरिकता के संबंध में उनके खिलाफ जो भी कानूनी कार्रवाई की गई थी वह बंद कर दी जाएगी, साथ ही साथ उन्हें भारत के नागरिकों को प्राप्त होने वाली सभी सुविधा प्रदान की जाएगी और उन्हें भारत का स्थाई निवासी माना जाएगा.

कैसे करना होगा आवेदन?

नागरिक संशोधन अधिनियम CAA 2019-ऐसे व्यक्ति जो 31 दिसंबर2014 से पहले भारत में आकर बस गए थे.वे लोग भारतीय नागरिकता पाने के लिए आवेदन कर सकते हैं. भारतीय नागरिकता पाने की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन रखा गया है. इसके लिए सरकार ने ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया है. इस पोर्टल पर आवेदक को अपना वह वर्ष बताना होगा, जब उन्होंने बिना किसी दस्तावेज के भारत में प्रवेश किया था. भारत की नागरिकता पाने के लिए आवेदक से किसी तरह का दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा. पात्र विस्थापित को सिर्फ ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर अपना आवेदन जमा करना होगा. जिसके बाद गृह मंत्रालय आवेदन की अपने स्तर से जांच कराएगी. जांच में यदि आवेदक की पात्रता स्थापित होती है.तो आवेदक को भारत की नागरिकता प्रदान की जाएगी.CAA 2019 के अंर्तगत आवेदन के लिए सरकार दुआरा जारी आधिकारिक पोर्टल के लिए यहॉ क्लिक करे.

NRC कानून क्या है

नेशनल रजिस्टर सिटिजन बिल NRC-एक ऐसा रजिस्टर है. जिसमें भारत में रह रहे सभी वैध नागरिकों का रिकॉर्ड रखा जाएगा.एनआरसी की शुरुआत हमारे देश में 2013 में सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में असम राज्य में शुरू हुई थी. वर्तमान में केवल असम राज्य में ही एनआरसी लागू है. इसके अलावा किसी भी राज्य में एनआरसी लागू नहीं की गई है. असम की NRC की आधिकारिक बेवसाईट के लिए यहॉ क्लिक करे. लेकिन आपको बता दें हमारे देश के गृहमंत्री अमित शाह स्पष्ट कर चुके हैं कि देश में एनआरसी लागू की जाएगी. असम में अवैध रूप से घुसे हुए बांग्लादेशियों को देश से निकलने के लिए एनआरसी लागू की गई थी.एनआरसी के लिए आवश्यक दस्तावेजों में व्यक्त के पास रिफ्यूजी रजिस्ट्रेशन, आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, बीमा की पॉलिसी, सिटीजनशिप सर्टिफिकेट, पासपोर्ट, सरकार के द्वारा जारी किए गए लाइसेंस या सर्टिफिकेट में से किसी एक का होना बहुत ही जरूरी है. इन उपरोक्त दस्तावेजों के अभाव में व्यक्ति को अवैध प्रवासी माना जाएगा.

इस आर्टिकल मे हमने भारत मे लागू होने वाले नये कानून CAA के बारे मे विस्तार से बताने की कोशिश की है, कि भारत का CAA कानून: किसे और कैसे मिलेगी नागरिकता.

सरकारी योजनओ से सम्बंधित जानकारी के लिए यहॉ क्लिक करे.

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